BLOGGER TEMPLATES - TWITTER BACKGROUNDS »

Sunday, August 28, 2011

IK MUSAFIR

  इक मुसाफिर भटकता         
   न जाने क्या ढूँढता
   कभी हाथें मलता 
   कभी हाथें भरता 
   आवारगी संग  बढ़ता 
    सवालो से जूझता 
    इक लहर उठाता  
    इक मुसाफिर भटकता  
    न जाने क्या ढूँढता 
मन पे न काबू रख पाता
और मन को समझाता 
फिर मन की ही करता 
इक हमसफ़र बन चलता
दो कदम साथ  आगे बढ़ता 
फिर इक मुसाफिर भटकता
न जाने क्या ढूँढता
  कभी रोता ,कभी हँसता
  बिन बात यूँ ही  गुनगुनाता
  बिन बात को बात बनाता
  कुछ बातो से  जी बहलाता 
  और जीवन कुछ बातों से बुनता
   इक मुसाफिर भटकता
   न जाने क्या ढूँढता
      
  यूँ  ही किसी से जी लगाता
  हवाओं  से खेलता 
  पानी मे गोते   खाता
  कभी चिंगारी जलाता 
  इस मिट्टी से खाता 
  इक मुसाफिर भटकता 
  न जाने क्या ढूँढता

  कभी फिसलता,
  कभी संभलता
 कभी समझौता  करता
 कभी मन की करता
 कभी लाखों बातें सुन इक बात समझता
 इक मुसाफिर भटकता
 न जाने क्या ढूँढता

2 comments:

संजय भास्‍कर said...

मुझे आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा ! आप बहुत ही सुन्दर लिखते है ! मेरे ब्लोग मे आपका स्वागत है !

RISHAV-VERMA......... said...

sukriya